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गतिविधियॉ
हमारे बारे में जानकारी
तथा क्षमताएं
अपने पिछले कार्य निष्पादन पर गर्व महसूस करते हुए तथा भविष्य की जिम्मेदारियों को समझते हुए सीएसएमआरएस ने लगभग 150 कुशल इंजीनियरों और वैज्ञानिकों की एक टीम बनाई है, जिनमें से बहुत से इंजीनियर और वैज्ञानिक पिछले दो दशकों में विदेशों में सफलतापूर्वक आयोजित हुए विभिन्न यूएनडीपी/एनजीआई सहायता प्राप्त कार्यक्रमों के अंतर्गत प्रशिक्षण पा चुके हैं । अत्याधुनिक उपकरणों तथा प्रशिक्षित कार्मिकों से लैस केमृसाअशा, मौजूदा हाइड्रोलिक तथा अन्य सिविल इंजीनियरी संरचनाओं के सुरक्षा मूल्यांकन के अतिरिक्त, बांधों, पुलों, बहुमंजिला इमारतों, नाभिकीय तथा तापीय शक्ति केन्द्रों के अन्वेषण का कोई भी चुनौतीपूर्ण कार्य कर सकती है।
हमारी उपलब्धियॉ
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अन्वेषण केमृसाअनु.शाला ने पुलों , बहुमंजिली इमारतों, तापीय एवं नाभिकीय स्टेशनों, अपतट संरचनाओं इत्यादि के लिए नींव अभिलक्षण के अलावा देश में 1500 से अधिक मध्यम एवं बड़े बांधों के लिए भू-तकनीकी अन्वेषण का कार्य किया है ।
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परामर्श केमृसा.अनुशाला ने विभिन्न सिविल अभियांत्रिकी संरचनाओं के लिए भूयांत्रिकी तथा निर्माण सामग्री अभिलक्षण एवं पुरानी संरचनाओं के निदानात्मक अन्वेषण के क्षेत्र में केन्द्र सरकार/राज्य सरकारों/सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को परामर्श प्रदान किया है।
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अनुसंधान
केमृसा.अनु.शाला , द्वारा कई आधारभूत तथा अनुप्रयुक्त अनुसंधान समस्याओं का समाधान किया गया है।
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सूचना प्रसार
केमृसा.अनु.शाला ने सम्मेलन , कार्यशालाएं, प्रशिक्षण पाठयक्रम आयोजित करके तथा सम्बध्द साहित्य का प्रकाशन कर अपनी विशेषज्ञता से संबंधित सूचना के डाटा बैक के रूप में कार्य किया है ।
हमारे ग्राहक
- बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजनाओं का निर्माण करने वाली केन्द्र सरकार और राज्य सरकार की एजेंसियां तथा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम हमारे ग्राहक हैं हालांकि बहुत से प्रमुख औद्योगिक काम्प्लैक्स , बहुमंजिली इमारतों, तापीय शक्ति केन्द्रों इत्यादि के लिए भी के.मृ.सा.अनु.शाला ने परामर्श प्रदान किया है ।
- के.मृ.सा.अनु.शाला, विभिन्न यूएनडीपी, यूएसएआईडी, एनजीआई और अन्य संस्थागत सहयोग कार्यक्रमों के अन्तर्गत राष्ट्रीय स्तर की कार्यशालाओं तथा अल्पावधि पाठयक्रमों का आयोजन करके पूरे देश में परियोजनाओं की योजना बनाने, अन्वेषण करने, डिजाइन तथा निर्माण कार्य में लगे इंजीनियरों के साथ जानकारी बांटने में मुख्य भूमिका निभा रहा है ।
- केमृसा.अनु.शाला भूयांत्रिकी, कंक्रीट प्रौद्योगिकी तथा निर्माण सामग्री से संबंधित क्षेत्र में मानकीकरण के लिए भारतीय मानक ब्यूरो तथा फ्लाई-ऐश मिशन को सहायता प्रदान करता है ।
- बहुत सी तकनीकी सलाहकार समितियों को परियोजनाओं की विशेष एवं विशिष्ट समस्याओं के लिए सलाह दी जाती है ।
- राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर तकनीकी शोध-पत्रों में योगदान ।
- विश्वविद्यालयों तथा अन्य संगठनों को उनके शिक्षण कार्यक्रम आदि में सहायता ।
- उपरोक्त के अतिरिक्त सीएसएमआरएस द्वारा राज्य सरकारों एवं परियोजनाओं के कार्मिकों को परीक्षण एवं अन्वेषण के आंरभिक स्तर पर प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है।
- केमृसा.अनु.शाला दो समितियों अर्थात भारतीय राष्ट्रीय निर्माण सामग्री एवं संरचना समिति (आईएनसीसीएमएस) तथा भारतीय राष्ट्रीय भूतकनीकी अभियांत्रिकी समिति(आईएनसीजीई) के माध्यम से बहुत से विश्वविद्यालयो, संस्थानों तथा राज्य सरकारों को संबंधित क्षेत्र में अनुसंधान कार्यों में आर्थिक सहयोग दे रहा है।
संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (स.र.वि.का.) सहायता
केमृसा.अनु.शाला द्वारा किए जा रहे और उसके सम्मुख प्रस्तुत महत्वपूर्ण कार्यो को ध्यान में रखते हुए , यू.एन.डी.पी. इन सुविधाओं को बड़े पैमाने पर अद्यतन करने के उद्देश्य से आगे आया और अनुसंधानशाला के कर्मचारियों को विशेष रूप से मृदा यांत्रिकी, शिला यांत्रिकी, मृदा गतिकी, पाटन पत्थर तथा कंक्रीट प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अद्यतन जानकारी प्रदान की । यू.एन.डी.पी के विशेषज्ञों तथा अनुसंधानशला के कार्मिकों के बीच घनिष्ठ पारस्परिक क्रिया के परिणामस्वरूप अनुसंधानशाला में अनेक माइक्रोप्रोसेसर आधारित नवीनतम उपकरण लगाए गए हैं जिससे अनुसंधानशाला की क्षमता विकसित देशों की प्रयोगशालाओं के समकक्ष हो गई है ।
विशेष रूप से समस्याग्रस्त हिमालयी क्षेत्र , जहां पर अत्यधिक जल संभावना विद्यमान है, में विचाराधीन/निर्माणाधीन नदी घाटी परियोजनाओं की अदभुत समस्याओं से निपटने हेतु चुने गए विश्व के प्रमुख संस्थानों में इस अनुसंधानशाला के अनेक इंजीनियरों और वैज्ञानिकों ने उच्च प्रशिक्षण प्राप्त किया है ।
केमृसा.अनु.शाला से जुड़े विश्व के अनेक विख्यात विशेषज्ञों ने अनूठे एवं चुनौतीपूर्ण कार्यों का सफलतापूर्वक निष्पादन करने के लिए अनुसंधानशाला की अत्यधिक प्रशंसा की है ।
के.मृ.सा.अनुसंधानशाला-एनजीआई संस्थागत सहयोग कार्यक्रम
के.मृ.सा.अनुसंधानशाला, नई दिल्ली तथा नार्वेजियन भू तकनीकी संस्थान, ओस्लो नार्वे ने नवम्बर 2002 में 3 वर्ष की अवधि के लिए ' अनुप्रवाह ढांचों की सुरक्षा के लिए बांध जलाशयों में भू वैज्ञानिक खतरों का अन्वेषण' के क्षेत्र में संस्थागत सहयोग कार्यक्रम हेतु करार किया है। इस कार्यक्रम में नार्वेजियन विकास एवं सहयोग एजेंसी(एनओआरएडी) ने 2.83 मिलियन नोक की धनराशि निवेश की है। (1 नोक लगभग 6 भारतीय रूपयों के बराबर है ।)
इस कार्य के लिए नोराड द्वारा आवंटित की गई धनराशि, भारत तथा नार्वे के बीच द्विपक्षीय विकास सहयोग का एक घटक है ।
के.मृ.सा.अनुसंधानशाला ने एनजीआई, ओस्लो के साथ संस्थागत सहयोग कार्यक्रम के तहत पहले निम्नलिखित परियोजनाओं को सफलतापूर्वक पूरा किया है:-
'भारत में पुराने बांधों हेतु सुरक्षा मूल्यांकन और खतरा निर्धारण' पर के.मृ.सा.अनु.शाला और नार्वेजियन भूतकनीकी संस्थान, ओस्लो के मध्य संस्थागत सहयोग कार्यक्रम ( 2006-2008)
के.मृ.सा.अ.शाला ने ' अनुप्रवाह संरचनाओं की सुरक्षा हेतु बांध जलाशयों में भूवैज्ञानिक खतरों का अन्वेषण ' पर तीसरे संस्थागत सहयोग कार्यक्रम (2002-2006) को अप्रैल, 2006 में सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। परियोजना का उद्देश्य बांध जलाशयों में खतरों को कम करने और विद्यमान बांधों की संरचनात्मक सुरक्षा के अन्वेषण हेतु नवीनतम पध्दतियों के बारे में जानकारी प्राप्त करना था। इन परियोजनाओं के उद्देश्यों को पूरी तरह से प्राप्त किया गया और संबंधित प्राधिकरणों ने इन परियोजनाओं के सफल क्रियान्वयन के लिए सराहना की है ।
के.मृ.सा.अनु.शाला और एन.जी.आई , ओस्लो ने भारत में पुराने बांधों के सुरक्षा मूल्यांकन और खतरा निर्धारण के क्षेत्र में दोबारा नया सहयोग समझौता करने का निर्णय किया। ' भारत में पुराने बांधों हेतु सुरक्षा मूल्यांकन और खतरा निर्धारण' पर एक परियोजना प्रस्ताव को अंतिम रूप दिया गया है । इस परियोजना के अन्तर्गत सहयोग के निम्नलिखित क्षेत्र हैं:-
- सुधार उपायों को प्राथमिकता प्रदान करने के लिए फेलयर मोड्स एंड इकैक्ट एनालिसिस (एफ एम ई ए) एंड इवैंट ट्री एनालिसिस (ई टी ए) का क्रियान्वयन।
- खतरे में अनुप्रवाह अवयवों पर बांध विफलता के प्रभाव सहित भारत में बांधों के संभावित खतरों के मूल्यांकन हेतु एक पध्दति का विकास और आपदा एवं खतरों का मूल्यांकन करना।
- भारत में बांध की सुरक्षा हेतु वर्तमान सुरक्षा कानून , संहिताओं और दिशा निर्देशों का मूल्यांकन।
- मुख्य बांध संरचनाओं और जलाशय रिम का स्थायित्वता विश्लेषण।
- पुराने बांधों से संबंधित मूंल्यांकन और खतरों के न्यूनीकरण के लिए मापयंत्रण और निष्पादन पर आधारित मानीटरिंग ।
- चुनिंदा संकटग्रस्त बांधों , जिन पर तत्काल ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है, को पुन: स्थापित करने और मजबूत बनाने के लिए पध्दतियों का मूल्यांकन एवं निर्धारण।
बांधों के सुरक्षा मूल्यांकन और खतरा निर्धारण संबंधी एनजीआई के अनुभव का उपयोग भारतीय बांधों की दशाओं का मूल्यांकन करने के लिए किया जाएगा । क्योंकि के.मृ.सा.अनु.शाला विद्यमान बांधों के सुरक्षा मूल्यांकन और अनेक निर्माणाधीन बांधों के गुणवत्ता नियंत्रण और गुणवत्ता आश्वासन संबंधी कार्यों में लगा हुआ है , अत: यह संस्थागत सहयोग कार्यक्रम पूरे देश के लिए अत्यधिक लाभप्रद होगा । विद्यमान बांधों में से तीन से चार बांधों का विश्लेषण किए जाने की योजना है जिनका इस परियोजना के अन्तर्गत अभिनिर्धारण किया जाना है ।
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